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कमरा नम्बर- 2

गुजरात के एक सज्जन तपन कुमार भट्ट साहब से दो बार फोन पर बातचीत हुई है। वे एडवेंचर, डिटेक्टिव और मिस्ट्री वाली कहानियों के न केवल पाठक हैं, बल्कि इनके संग्रहकर्ता भी हैं। पिछली बातचीत में उन्होंने ही मुझे बताया था कि विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय की ‘हीरा माणिक ज्वले’ एक साहसिक गाथा है, नहीं तो शीर्षक पढ़कर मैं इसे समाजिक उपन्यास समझ रहा था। (जानकारी मिलने के बाद बाकायदे मैंने इसका अनुवाद किया और निकट भविष्य में यह अनुवाद ‘वीरान टापू का खजाना’ शीर्षक से ‘साहित्य विमर्श’ द्वारा प्रकाशित हो सकता है। सुलू सागर के एक वीरान टापू पर खजाने की खोज की यह रोमांचक साहसिक गाथा है।) हाल की बातचीत में उन्होंने बताया कि ब्योमकेश बक्शी की दर्जन भर कहानियों का हिन्दी अनुवाद नहीं हुआ है। उन्होंने उन कहानियों की सूची भेजी है और वे चाहते हैं कि मैं उनका अनुवाद करूँ। मैंने उनसे कहा कि ठीक है, ‘कमरा नम्बर- 2’ कहानी से मैं यह शुरुआत करता हूँ।

कुमार-बिमल शृंखला की कहानी ‘अफ्रिका अभियान’ के बाद अब मुझे जयन्त-माणिक शृंखला की कहानी ‘शनि-मंगल का रहस्य’ का अनुवाद करना था, लेकिन इससे पहले ‘कमरा नम्बर- 2’ का अनुवाद मैंने पूरा कर लिया है, क्योंकि कहानी बहुत लम्बी नहीं थी।

दूसरी बात। पता चल रहा है कि किन्हीं प्रबीर चक्रवर्ती के पास शरदिन्दु बन्द्योपध्याय की रचनाओं के स्वत्वाधिकार हैं, लेकिन उनका कोई सम्पर्क सूत्र नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें सूचित किये बिना और उनसे अनुमति लिये बिना मैं इस कहानी को प्रस्तुत कर रहा हूँ। किसी तरह की आपत्ति होने पर इसे हटा लिया जायेगा। तब ब्योमकेश बक्शी की कहानियों के हिन्दी अनुवाद को इस वेबसाइट पर 2030 के बाद ही प्रस्तुत किया जा सकेगा।

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