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‘वीरान टापू का खजाना’- ‘साहित्य विमर्श’ पर

जैसा कि बताया जा चुका है, ‘जगप्रभा’ की कुछ ई’पुस्तकों को ‘साहित्य विमर्श’ द्वारा मुद्रित पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है; उसी कड़ी में ‘वीरान टापू का खजाना’ उनकी ओर से प्रकाशित हो चुका है।

यह बिभूतिभूषण बन्द्योपध्याय द्वारा रची एक साहसिक गाथा है। बँगला लेखक बिभूतिभूषण बन्द्योपध्याय के प्रति हम हिन्दीभाषियों की आम धारणा क्या है? सामाजिक उपन्यासों के एक लेखक की। हम बस उन्हें “पथेर पाँचाली” के लेखक के रूप में जानते हैं; लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने उच्चस्तरीय साहसिक गाथाएं और परालौकिक कहानियाँ भी लिखी हैं। उन सबका हिन्दी अनुवाद कर हम हिन्दीभाषियों के बीच बनी उनकी छवि को एक नया दृष्टिकोण देना चाहते हैं।

साहसिक गाथाओं की “त्रयी” पूरी हो गयी। पहली गाथा- “चाँद का पहाड़”, दूसरी गाथा- “सुन्दरबन में सात साल” और अब तीसरी साहसिक गाथा- “वीरान टापू का खजाना” भी प्रकाशित हो गयी। ये विश्वस्तरीय साहसिक गाथाएं हैं। किशोरों-नवयुवाओं के लिए must-read हैं। इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि हिन्दीभाषी अब तक इनसे अनजान थे!

कहानी की पृष्ठभूमि है— सुलू सागर! हममें से कितने परिचित हैं इससे? बहुत कम। बोर्नियो और फिलीपीन्स द्वीपसमूह के बीच यह सागर है। इसके उत्तर में दक्षिणी चीन सागर है और दक्षिण में सुलावेसी सागर। आज से 40-50 साल पहले इसे रहस्यमयी सागर माना जाता था। यहाँ बहुत सारे ऐसे द्वीप हैं, जो घने जंगलों से ढके हुए हैं।

ऐसे ही एक द्वीप में है, 9वीं सदी, या शायद इससे भी पहले की एक नगरी के ध्वंसावशेष और उनके बीच छुपा है एक खजाना। मनीला के जुए के अड्डे के एक अन्धेरे कमरे में मरणासन्न दक्षिण-भारतीय बूढ़ा नाविक नटराजन— जो कभी समुद्री लुटेरा रह चुका होता है— अपनी काँपती आवाज में यह बात जहाज के एक खलासी जमातुल्ला को बताता है। कुछ समय बाद जमातुल्ला कोलकाता में सुशील को यह बात बताता है। सुशील अपने ममेरे भाई सनत और जमातुल्ला को साथ लेकर निकल पड़ता है उस अनजाने टापू की खोज में। दूसरी तरफ, एक गुप्त संगठन है, जो इस ‘पवित्र’ खजाने की रक्षा के लिए मलय “बोलो” (बड़े हँसुए-जैसा हथियार) से किसी का भी सिर धड़ से अलग कर देने के लिए उद्यत रहता है। इस कारण सिंगापुर में वे अपने दल में शामिल करते हैं पूर्व जलदस्यु यार हुसैन को उसके कुछ शागिर्दों के साथ। इन सबको उस टापू तक पहुँचाता है एक अनुभवी चीनी मल्लाह, अपने “जंक” से। “चीनी जंक” से आप परिचित हैं?

कुल-मिलाकर, एक रोमांचक दास्तान। पढ़ा जाय और बिभूतिभूषण-जैसे महान लेखक के सामने नतमस्तक हुआ जाय ऐसी उच्चस्तरीय साहसिक गाथाएं लिखने के लिए!

साहित्य विमर्श पर “वीरान टापू का खजाना”: https://www.sahityavimarsh.in/veeraan-tapu-ka-khazana/

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