हिन्दी ई’पुस्तकें, खास तौर पर किशोर पीढ़ी के लिए…..

Adventure (Kumar-Bimal Series)

Detective (Jayant-Manik Series)

Horror (Long Stories)

Horror (Short Stories)

Adventure (Printed Books)

These stories (novelettes) have been published by ‘Sahitya Vimarsh’ and are presently available on their website as printed books. These are external links.

eBooks: on Amazon (Kindle Edition)

Following eBooks of JagPrabha are available exclusively on Amazon as Kindle Edition:

सर्पमानव

भूत बँगला

मिश्मी लोगों का कवच

Featured (Naz-E-Hind Subhash)


नेताजी सुभाष की गाथा: 1941 से 1945 तक, और उसके बाद … भारतीय युवाओं के लिए।

Others

Children

Supernatural (Long Stories)

These stories may be available for sale by June 2024.

पहली कहानी: श्मशान-साधना का अनुभव

Taranath Tantrik 1

दूसरी कहानी: मधुसुन्दरी देवी का आविर्भाव

Taranath Tantrik 2

Megh-Malhar

Supernatural (Short Stories)

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Abhishapt Pukar

Aakash-Pari

Puratatwa

अनुवादक की ओर से निम्नलिखित कुछ ऐसी बँगला रचनाओं का भी हिन्दी अनुवाद किया गया है, जो अभी ‘कॉपीराइट’ के दायरे में हैं और जिस कारण उन्हें वितरित नहीं किया जा सकता। इन्हें पढ़ने/प्रकाशित करने के लिए इच्छुक पाठक/प्रकाशक jagprabha.bhw@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं:

सत्यजीत राय:

फेलू’दा शृंखला:

1/35. फेलू’दा दार्जिलिंग में (फेलूदार गोयेन्दागिरी, 1965)

2/35. बादशाही अँगूठी (उर्फ, फेलू’दा लखनऊ में) (बादशाही आँग्टी, 1966)

3/35. कैलाश चौधरी का रत्न (कैलाश चौधुरीर पाथर, 1967)

4/35. सियार देवता रहस्य (शेयाल देबता रहस्य, 1969)

5/35. गैंगटोक में गड़बड़झाला (उर्फ, फेलू’दा गैंगटोक में) (गैंगटोके गण्डगोल, 1970)

6/35. सोने का किला (उर्फ, फेलू’दा जोधपुर-जैसलमेर में) (सोनार केल्ला, 1971)

7/35. ब्रीफकेस रहस्य (उर्फ, फेलू’दा शिमला में) (बाक्स रहस्य, 1972)

8/35. चाबी रहस्य (समाद्दारेर चाबि, 1973)

प्रो. शंकु शृंखला:

1/38: अन्तरिक्षयात्री की डायरी

2/38: प्रो. शंकु और मिश्र का आतंक

3/38: प्रो. शंकु और हड्डी

4/38: प्रो. शंकु और मैकाओ

5/38: प्रो. शंकु और अद्भुत पुतले

6/38: प्रो. शंकु और गोलक रहस्य

रहस्यकथाएं:

1. हिस्स (खगम)

2. जहरीले फूल (विषफूल)

3. तीसरी आँख (बातिकबाबू)

तारिणी चाचा के लोमहर्षक किस्से

  1. डुमनीगढ़ का आदमखोर (डूमनीगड़ेर मानुषखेको)

शरदिन्दु बन्द्योपाध्याय:

ब्योमकेश बक्षी शृंखला:

1. कमरा नम्बर- 2 (रूम नम्बर दुई, 1964)

2. लोहे के बिस्कुट (लोहा’र बिस्कुट, 1969)

3. शमा परवाना (बन्ही पतंग, 1956)

4. मर्डर इन महाबलेश्वर (शैलरहस्य, 1959)

“बनफूल”:

“बनफूल” की 60 कहानियाँ, एक लघु उपन्यास- “भुवन सोम” और एक वृहत् उपन्यास- “डाना।”