एक लम्बे अरसे के बाद जगप्रभा पर एक ई’पुस्तक जोड़ी जा रही है- “लालू की शरारतें।” बँगला के सर्वश्रेष्ठ लेखक माने जाने वाले शरत् चन्द्र चट्टोपाध्याय की लिखी लालू की तीन कहानियाँ इसमें शामिल हैं।
पिछले कुछ समय से हम “बनफूल” की 30 कहानियों के अनुवाद में लगे हुए थे। वह काम पूरा हुआ। अब मेरे पास बनफूल की 100 कहानियों का अनुवाद मौजूद हो गया है। हमने एक बड़े प्रकाशक को यह बताते हुए सम्पर्क किया। उनसे “डाना” का भी जिक्र किया। उन्होंने रुचि दिखायी तो है, पाण्डुलिपियाँ उन्हें भेज भी दी गयी हैं, अब आगे देखा जाय।
इस काम के बाद हमें जगप्रभा के काम में लगना था, लेकिन उसी समय लखनऊ से एक फोन आया कि बाल-किशोर कहानियों का एक बड़ा संग्रह तैयार किया जा रहा है, जिसमें देश की विभिन्न भाषाओं से भी कुछ बाल-किशोर कहानियाँ शामिल रहेंगी। मुझसे बँगला से 5 कहानियों का अनुवाद भेजने के लिए कहा गया। हमने शरत् चन्द्र चट्टोपाध्याय, विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय, राजशेखर बसु (परशुराम), सुकुमार राय और हेमेन्द्र कुमार राय की एक-एक बाल-किशोर कहानियों का अनुवाद करके उन्हें भेज दिया। इसमें शरत् चन्द्र रचित लालू की दूसरी कहानी हमने उन्हें भेजी। तभी हमें ध्यान आया कि क्यों न बँगला के सर्वश्रेष्ठ लेखक की एक ई’पुस्तक जगप्रभा पर भी हो। तो लगे हाथ हमने लालू की बाकी दोनों कहानियों का भी अनुवाद कर डाला और इस तरह से लालू की तीनों कहानियों को एक ई’पुस्तक के रूप में प्रस्तुत कर दिया।
-जयदीप
25.09.2024
