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फेलू’दा पर एक आलेख

इस बात का जिक्र करना हम भूल गये थे कि फेलू’दा पर लिखा हुआ मेरा एक आलेख “अहा जिन्दगी” के ताजा अंक (ऑनलाईन संस्करण) में प्रकाशित हुआ है।

बीते अगस्त में ही एक ई’मेल आया था कि क्या जासूस फेलू’दा पर ऐसा एक लेख लिखा जा सकता है, जो किशोरों के लिए प्रेरणादायी भी हो? हमने कहा- लिखा जा सकता है।

फिर हमने इस तरह का एक आलेख तैयार कर उन्हें भेज दिया। बाद में उस आलेख को संक्षिप्त भी किया, क्योंकि आलेख को दो हजार शब्दों की सीमा के अन्दर बाँधना था।

वह आलेख सितम्बर में प्रकाशित हुआ और हमें इसका उचित पारिश्रमिक भी मिला।

“अहा जिन्दगी” के प्रति आभार।

उस आलेख को इन दो चित्रों में पढ़ा जा सकता है:

(उनका एक एप भी है।)

-जयदीप

25.09.2024

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